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'मैरिटल रेप'


 दुनिया भर के कई देशों में मैरिटल रेप या शादीशुदा संबंध के दौरान होने वाले बलात्कार को अपराध माना जाता है.

अमरीका में भी साल 1993 से शादी में बलात्कार या मैरिटल रेप को कानूनी तौर पर अपराध माना गया है.

यहां के कई राज्यों में शादी में रेप के मामले में दोषी व्यक्ति को 7 साल से लेकर उम्र कैद तक की सज़ा हो सकती है. इसके अलावा 50 हज़ार डॉलर तक के जुर्माने की भी व्यवस्था है.

लेकिन कानून होने के बावजूद अमरीका में ऐसी हिंसा की शिकार महिलाओं की स्थिति कमोबेश भारत की महिलाओं जैसी ही है.

नहीं होती है शिकायत

अमरीका में अब भी बहुत सी महिलाएं शादी में रेप को लेकर पुलिस के पास जाने से कतराती हैं.

न्यूयॉर्क में पारिवारिक मामलों की वकील फ़रीदा खान पति-पत्नी से जुड़े विभिन्न मामलों पर सालों से काम कर रही हैं.

वे कहती हैं कि मैरिटल रेप जैसे अपराध में कानून होने के बावजूद पीड़ित पत्नी को केस आगे ले जाने में मुश्किल होती है.

वकील फ़रीदा खान कहती हैं, "मेरिटल रेप के मामले में भी पहले तो किसी को शिकायत करनी होती है, फिर पुलिस के सामने लिखित बयान देना होता है. इसके बगैर पुलिस कुछ नहीं कर सकती. और इस तरह बहुत सी महिलाएं मैरिटल रेप की शिकायत करने से पीछे हट जाती हैं."

शादी में रेप

न्यूयॉर्क में पारिवारिक मामलों की वकील फ़रीदा खान पति-पत्नी से जुड़े विभिन्न मामलों पर सालों से काम कर रही हैं.

वे कहती हैं कि मैरिटल रेप जैसे अपराध में कानून होने के बावजूद पीड़ित पत्नी को केस आगे ले जाने में मुश्किल होती है.

वकील फ़रीदा खान कहती हैं, "मेरिटल रेप के मामले में भी पहले तो किसी को शिकायत करनी होती है, फिर पुलिस के सामने लिखित बयान देना होता है. इसके बगैर पुलिस कुछ नहीं कर सकती. और इस तरह बहुत सी महिलाएं मैरिटल रेप की शिकायत करने से पीछे हट जाती हैं."

शादी में रेप

न्यूयॉर्क में पारिवारिक मामलों की वकील फ़रीदा खान पति-पत्नी से जुड़े विभिन्न मामलों पर सालों से काम कर रही हैं.

वे कहती हैं कि मैरिटल रेप जैसे अपराध में कानून होने के बावजूद पीड़ित पत्नी को केस आगे ले जाने में मुश्किल होती है.

वकील फ़रीदा खान कहती हैं, "मेरिटल रेप के मामले में भी पहले तो किसी को शिकायत करनी होती है, फिर पुलिस के सामने लिखित बयान देना होता है. इसके बगैर पुलिस कुछ नहीं कर सकती. और इस तरह बहुत सी महिलाएं मैरिटल रेप की शिकायत करने से पीछे हट जाती हैं."

शादी में रेप

फरीदा खान बताती हैं कि पुलिस पीड़ित महिलाओं से कहती भी हैं कि आप अपनी शिकायत बस लिखित में दे दें, बाकी कार्रवाई हम करेंगे, लेकिन महिलाएं डर जाती हैं और मामला आगे नहीं बढ़ातीं.

वकील बताती हैं कि जब महिलाएं ये तय कर लेती हैं कि वे पति से तलाक लेंगी तभी वे मैरिटल रेप के कानून का इस्तेमाल करती हैं.

अमरीका में अब भी शादी में रेप के मामलों के बारे में सर्वेक्षण कम ही हैं.

सैनफ्रांसिस्को के एक सर्वेक्षण के अनुसार 8 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं शादी में रेप का शिकार हुईं.

जबकि बॉस्टन शहर में किए गए एक सर्वेक्षण में ये बात सामने आई कि 10 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं अपने पति के हाथों बलात्कार का शिकार बनीं.

भविष्य और सुरक्षा का भय

अमरीका में कानून होने के बावजूद यहां रहने वाली बहुत सी दक्षिण एशियाई मूल की महिलाएं भी मैरिटल रेप के मामले में आगे नहीं आती हैं.

रुबीना नियाज़ पिछले 25 वर्षों से न्यूयॉर्क में टर्निंग प्वाईंट नाम की एक संस्था चला रही हैं. ये संस्था घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद करती है.

वे कहती हैं कि अधिकतर दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं को ये तक नहीं मालूम कि मैरिटल रेप नाम की कोई चीज़ होती भी है.

रुबीना कहती हैं, "हमारी संस्कृति में तो खासतौर पर महिलाओं को अंदाज़ा ही नहीं होता कि मैरिटल रेप जैसी कोई चीज़ है. उन्हें तो यही लगता है कि उनका काम है पति के लिए समर्पित हो जाना. और अगर पता हो भी तो वे सोचती हैं कि कहीं पति को जेल हो गई तो उनका और बच्चों का क्या होगा."

उनका कहना है कि घरेलू हिंसा के मामले अक्सर आते रहते हैं जिसमें मैरिटल रेप भी शामिल है.

एक ऐसे ही मामले में एक महिला मैरिटल रेप का मामला लेकर आईं और उन्हें जब पुलिस थाने भेजा गया तो वहां उन्होंने लिखित में बयान देने से मना कर दिया.

साबित करना मुश्किल

यूं तो अमरीका में बलात्कार के खिलाफ सख़्ती से कानून लागू करने के लिए पुलिस और प्रशासन तत्पर रहता है, लेकिन मैरिटल रेप में पीड़ितों के लिए आरोप साबित करना बहुत मुश्किल होता है.

भारतीय मूल की पूजा राज न्यूयॉर्क में एक गैर-सरकारी संस्था 'सखी' से जुड़ी हैं.

पूजा कई बलात्कार पीड़ित महिलाओं की मदद कर चुकी हैं. उनका कहना है कि मैरिटल रेप के सबूत जुटाना बेहद मुश्किल होता है.

वे कहती हैं, "मैरिटल रेप को साबित करना यहां न्यूयॉर्क में भी बहुत मुश्किल होता है. पीड़ितों से मामले की पूरी जानकारी लेना काफी दुश्कर काम है. उसके अलावा केस मज़बूत करने के लिए पीड़िता को अदालत में भी पेश करने की कोशिश की जाती है, जो बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि पीड़िता को हमलावर का सामना करना पड़ता है."

संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने भी मैरिटल रेप को अपराध माना है.

संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से संबंधित कनवेंशन ऑन द एलिमिनेशन ऑफ आल फार्म्स ऑफ डिसक्रिमिनेशन अगेंस्ट विमेन या UN CEDAW के कानून के तहत मैरिटल रेप को आपराधिक ही माना गया है.

और संयुक्त राष्ट्र द्वारा लाई गई औरतों के ख़िलाफ़ अत्याचार ख़त्म करने के लिए बनी कमिटी ने शादी में रेप को कानूनन अपराध मानने की सभी देशों से सिफारिश भी की है.

 


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