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 शहर में बिना अनुमति  मोबाइल टावर खड़े करने के बाद भी सरकार मोबाइल टावर कम्पनियों के पक्ष में दिखाई दे रही है। अब राज्य सरकार की आेर से डीम्ड एनओसी का आदेश पिछले माह जारी किया गया है। आदेश में मोबाइल टावर कम्पनियों के आवेदन को 45 दिन में एनओसी जारी कर मामला निस्तारण का आदेश दिया गया है।

 

मोबाइल टावर लगाने के लिए आए  आवेदन के 30 दिन में आवेदन का निस्तारण नहीं किया जाता है तो 45 दिन बाद मोबाइल टावर लगाने वाले डीम्ड एनओसी मानते हुए स्वप्रेरणा से राशि जमा करवा कार्य शुरू कर देंगे। इसी तरह का आदेश नगरीय विकास विभाग की ओर से 11 मार्च को जारी किया गया है। 

 

 

नगर परिषद के विज्ञापन में भी स्कूल का हवाला

सीकर शहर में 4 जी के लिए लगने वाले टावर के लिए न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना की जा रही है। नगर परिषद की ओर से जारी आपत्ति सूचना में भी स्कूलों वाली जगहों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा आबादी क्षेत्र वाली जगहों का भी उल्लेख किया गया है।

 

राधाकिशनपुरा क्षेत्र में लगने वाले बड़े टावर के पास स्कूल को बताया गया है। इसके अलावा फतेहपुर रोड पर मारू स्कूल के बारे में लिखा गया है। इसी तरह राणी शक्ति रोड पर भी राजकीय विद्यालय के बारे में बताया गया है। चांदपोल गेट के पास टावर वाली लोकेशन के महज सौ मीटर पर बालिका स्कूल है।

 

आपत्ति पर सुनवाई के बाद आगे निर्णय

शुक्रवार को नगर परिषद में सभी नौ टावर के लिए मिली आपत्तियों पर सुनवाई की जाएगी। आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान रेडिएशन के खतरे को लेकर लोग तथ्यात्मक दस्तावेज लेकर पहुंचते हैं तो उनका पक्ष अधिक मजबूत माना जाएगा।

हालांकि टावर वाले स्थानों के लिए जनता की सहमति भी अहम मानी गई है। आपत्ति दर्ज करवाने वालों को नोटिस जारी कर बुलाया भी गया है। इस दौरान कम्पनी के प्रतिनिधियों को भी अपनी दलील देनी होगी।

प्रतिनिधि नहीं पहुंचने पर मौका देखा जाएगा

नगर परिषद में मोबाइल टावर को आपत्ति दर्ज करवाने वाले लोगों के अलावा कंपनी के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे तो नगर परिषद के अधिकारी प्रस्तावित टावर वाली जगहों का मौका देखेंगे। इसके बाद मैरिट के आधार पर ही फैसला किया जाएगा।

 

अधिकारी को देना होगा स्पष्टीकरण्

मोबाइल टावर आवेदन के मामले में तीस दिन में आपत्ति नहीं आने पर नगर परिषद के अधिकारियों की ओर से मामले का निस्तारण नहीं करने पर मुख्यालय लिखित में स्पष्टीकरण भेजना होगा। एेसे में अब इसी आदेश की आड़ में कई मोबाइल टावर कम्पनी वाले नगर परिषद अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं, हालांकि एेसे आदेश के बाद भी सीकर नगरपरिषद की आेर से टावर के लिए अनुमति जारी नहीं की है।

 

फायदा देने के लिए नियमों में किया गुपचुप बदलाव

नगरीय विकास विभाग ने टावर की अनुमति देने के लिए जमकर खेल खेला है। नियमों में मनमर्जी का बदलाव किया है।  एक आदेश में तीस फीट चौड़ाई वाली सड़क पर भी टावर के लिए अनुमति देने तथा मकान में टावर लगाने के लिए जमीन को कामशियल लैण्ड में कनवर्ट करवाने की अनिवार्यता भी हटा दी है। इस संबंध में पिछले वर्ष नौ अक्टूबर को आदेश जारी किया है।

 

सड़क खोदने में भी नियमों की अनदेखी

सीकर शहर में कम्पनी की ओर से 4 जी के लिए डाली गई केबल लाइन में भी नियमों की अनदेखी की गई। नगर परिषद की आेर से इसके लिए निर्धारित दर से अधिक वसूली की है। कम्पनियों की ओर से केबल डालने के दौरान कई स्थानों बीएसएनएल की लाइनों को भी तोड़ दिया तो कई जगह पानी की लाइनों को तोड़ दिया। शहर में लोगों के विरोध में आगे आने के बाद नगर परिषद व अन्य विभाग चेते।

 

 डीम्ड एनओसी का पत्र मिला था। सीकर में 4 जी मोबाइल टावर के लिए आपत्ति आई है। आपत्तियों की सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। दोनों पक्षों में कोई भी नहीं पहुंचने पर मौके पर जाया जाएगा।


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